Friday, March 30, 2018

मेरा क्या ही होगा

मेरा क्या ही होगा, 
जो बंदिशें उठ जाएंगी
जो पहरे छुट जाएंगे 
ये भागादौड़ी सी जो बिसरी है
सहसा जो ये रुक जाएगी 
मेरा क्या ही होगा 

अंधेरी रात फैली है
उजाले में अभी कुछ देरी है
दिया जलने से रातों के 
इरादों का ही बयां होगा
मेरा क्या ही होगा 

उषा, देखो वो, आती है
तिमिर कैसे मिटाती है 
रात के सपने अधूरे 
रह गए जो आंख मींचे 
स्वप्न की उन तरंगो से
फिर कभी संवाद होगा? 
मेरा क्या ही होगा

उषा, आशा भी लायी है
जिजीविषा जैसे बढ़ाई है 
नव-स्वप्न को साकार करने
रात्रि का प्रस्थान होगा 
मेरा उत्थान होगा

२/२४/२०१८

No comments: