Saturday, October 27, 2007

जिजीविशा

वो आफताब गया साहिल मे जब,
भर गया समा हलचल मे तब,
एक ओर दिखा तूफान जहाँ,
एक ओर भरा अन्दर ही सब,
फिर उठी तूफान की हिल्लोरे,
दिल भरा रहा अन्दर ही तब,
कोई दिखा गगनचुम्बी होता,
कोई आतिशय धरागामी होता,
तूफान थमेगा एक दिन जब,
धरातल पे होगा सबकुछ तब,
अब कौन धरागामी है यहाँ,
अब कौन गगन चुम्बी है यहाँ,
कौन स्वयं से ही है व्याकुल,
कौन स्वयं से व्यथित यहाँ.

वैभव श्रीवास्तव