ये जो पानी की हैं बूंदे,
न जाने किसको ये ढूंढें |
न जाने किसने दिल कुचला,
न जाने जी कहाँ मचला||
एक सैलाब आया था,
संग पानी वो लाया था|
है मरु-दिल तंग लोगो का,
ये पानी ना यहाँ बरसे||
कोई तन्हा मुकम्मल है,
कोई है साथी को ढूंढें |
सभी जलते अंगारों पे,
हमेशा पानी को ढूंढें ||
पातित्य जल की बूंदों मे,
ये बूंदे किस तरह बरसे|
व्यथित मन को दिलसा दो,
ये बूंदे आज ना बरसे||
वैभव श्रीवास्तव
Sunday, May 11, 2008
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