(बचपन)
अतीत के वो हसीन लम्हे, वो सुकून वाले दुःख-हीन लम्हे।
है याद मुझको कुछ ज़रा से, वो बालपन के बेहतरीन लम्हे।।
वो मस्तियों के इल्म वाले, उल्लास से भरपूर लम्हे।
चाह कर भी न पकड़ आते, वो चुलबुले शौक़ीन लम्हे।
अमराइयों की छाँव वाले, मौसमों से अनभिज्ञ लम्हे।
कन्दुकों की क्रीड़ाओं के आनंद से परिपूर्ण लम्हे।।
(किशोरावस्था)
धर पकड़ लेंगे ये दुनिया, बीतने दो चंद लम्हे।
ओज-पोषित, विश्वास-धारी, यथार्थ से दिग-भ्रंत लम्हे ।।
समुद्र से ठहराव वाले, लहर से गतिमान लम्हे।
लेते तरंगों का मज़ा, अनमने वो किशोर लम्हे।।
ध्येय-साधन में उलझते, असमंजसी, अनजान लम्हे।
ललकारते साहस को अक्सर, वो श्रम भरे बेबाक लम्हे।।
(युवावस्था)
दोस्तों के साथ वाले, ज़िन्दगी के जवान लम्हे।
घुमक्कड़ी का शौक पाले, वो जग समझते बलवान लम्हे।।
नव-क्रियाओं में उलझते, वो प्रयोग वाले अतिधीर लम्हे।
वो असफलताओं पर सिसकते, रून्धते से हताश लम्हे ।।
गर्त से वापस उभरते, शक्ति से परिपूर्ण लम्हे।
देते चुनौती, युद्ध करते, माँगते सम्मान लम्हे।।
फैसलों का बोझ ढोते, दायित्व से मजबूर लम्हे।
अभिव्यक्ति को सहसा तरसते, अटपटे, हैरान लम्हे।।
परिजनों के सुख में पुलकित, वो प्रफुल्लित संज्ञान लम्हे।
कर्त्तव्य-पूरक, मार्गदर्शक, सामर्थ्यशाली, अनुकूल लम्हे।।
(वृद्धावस्था)
ज़िन्दगी का करते विवेचन, कर रहे विश्राम लम्हे।
सार जीवन का समझते वानप्रस्थी मतिमान लम्हे।।
पूर्व-पग के वैभवों की याद के अविराम लम्हे।
आज के युग को बहिष्कृत कर रहे जड़वान लम्हे।।
काल-चक्रों में निहित वे, सत्यपोषित अभिज्ञान लम्हे।
त्याग-प्रेरित और समर्पित, संन्यास के सर्वज्ञ लम्हे ।।
चल रहे हैं निरंतर, साथ सबके, ये महान लम्हे।
है समेटे, अपने भीतर, ज़िन्दगी का सार लम्हे।।
झांक कर देखो ज़रा तो, मार्गदर्शक अतिश्रेष्ठ लम्हे।
युक्तिपूरक, सर्वव्यापी, ब्रह्मांड के धीमान लम्हे।।
वैभव श्रीवास्तव