Saturday, December 31, 2011

एक बरस बीत गया

एक बरस बीत गया, एक बरस बीत गया

शीत की रैन से, शीत की रैन तक,
मौसम अनेक, बीच में छोड़ गया,
एक बरस बीत गया|

माला हरी मिली कहीं,
तो लाल रंग कहीं उड़ेल गया,
एक बरस बीत गया|

अकर्मण्यता भरे दिनों में, राह तो प्रशस्त कर,
कर्म से भरे दिनों में, जिजीविशा झंझोर गया,
एक बरस बीत गया |

आदि है नए बरस का, रैन से फिर रैन तक,
दिवस कहो तो ये दिवस है,
एक दिवस बीत गया, एक दिवस बीत गया|

वैभव श्रीवास्तव