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मेरी कलम से
Friday, October 26, 2007
जीवन दर्शन
जीवन आपाधापी की कल्पना है,
तू तो बस एक भंवर मे फना है,
साहिल पे पहुंचेगे ये तो तमन्ना है,
पर किसको पता की रस्ता कितना घना है|
वैभव श्रीवास्तव
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About Me
वैभव
एक लंबे समय से मुझे कविताएं और गज़ले पढ़ने का शौक रहा है| पिछले कुछ सालों में मैंने काफी समय के बाद फिर से कविता लिखना शुरू किया | ये ब्लॉग मेरी इन नवीन कविताओं का संग्रह है |
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