तू हबीब है, तू रक़ीब है|
ये शहर वस्ल-ए-मजीद है||
ये जो इश्क है, ये हसीन है|
वो शक्श माह्ज़बीन है ||
ए उदू! तुझे हो ये इक्तिला|
मेरे पास ऐसा व़जीर है ||
तुझे देख कर मैं हूँ सोचता|
कैसा प्यारा मेरा नसीब है ||
वैभव श्रीवास्तव
Monday, January 9, 2012
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